Mere Bol

Tol mol ke bol- Par sach to bol

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Bhupesh Kumar Rai


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कोयले की कालिख-सफेदपोशों पर

Posted On: 20 Sep, 2012  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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ढोंगी सब संसार में?

Posted On: 17 Apr, 2012  
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अरे! मर्द हो तो मच्छर बनकर दिखाओ न.

Posted On: 12 Apr, 2012  
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विशेषाधिकार हनन और टीम अन्ना (जागरण जंक्शन फोरम)

Posted On: 4 Apr, 2012  
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ये कहाँ जा रहे हम?

Posted On: 2 Apr, 2012  
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Others मेट्रो लाइफ में

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दाल में काला या काले में दाल?

Posted On: 30 Mar, 2012  
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Posted On: 29 Mar, 2012  
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भैया! कब तक रूठे रहोगे?

Posted On: 27 Mar, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

सत्ता की ताकत है जो विरोध करेगा अन्दर कर देंगे. अन्दर जाने के बाद अपने भी मुंह मोड़ने लगते हैं. सो अन्दर जाने से अच्छे -अच्छे डरते हैं .ये व्यवस्था का ही तो कमाल है कि एक सीधे-भले आदमी को पकड़कर अंदर कर दो उसकी जमानत करने में नानी याद आ जाएगी. वहीं एक भ्रष्ट या रसूख वाले को बंद करके दिखाओ तो तमाम सिफारिशें आ जाएंगी, और जमानत भी हो जाएगी.लाठी का बड़ा दुरूपयोग हो रहा है.यह उसी के सर पर बज रही है जो विरोध का साहस कर रहा है.जो भ्रष्टाचार की नदी में हाथ साफ कर रहा है,लाठी उसी का सहारा बन गई है.भ्रष्ट नेताओं और भ्रष्ट अफसरों में गजब की जुगलबंदी है.इसी जुगलबंदी का परिणाम है कि भ्रष्ट अफसर मलाईदार पदों को प्राप्त कर, अपने आका के उपकार का बदला चुकाते हैं और घोटाले होते रहते हैं. sahi कहा आपने ! नयी योजनायें बनाना और apna स्वार्थ सिद्ध करना और जनता का ध्यान बाँट देना बस यही कार्यक्रम है सरकार का.अब कुर्सी बचाने के लिए देश का धन लुटाया जाएगा.देखिये .कब तक ये अपना उल्लू सीधा करते हैं और कब तक जनता का उल्लू बनाते हैं

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